शनिवार, 17 दिसंबर 2011

आदरणीय ? प्रधानमंत्रीजी ! क्या आपने भारत के इतिहास को पढ़ा है? क्या आपने इसकी सभ्यता की गहराई को नापा है? क्या आपने इसकी संस्कृति और संस्कार की विराट शक्ति को भांपा है? क्या आपने वीर शिवाजी की गाथा को सुना है? क्या आपने गुरुगोविंद सिंह की क़ुरबानी को गुना है? क्या आपने प्रधानमन्त्री की अपनी भूमिका को जांचा है? क्या आपने अपनी आका को परखा है? नहीं प्रधान मंत्री जी बिलकुल नहीं ! एक अतिमहत्वकांक्षी महिला के प्रधानमन्त्री की कुर्सी पर चाहकर भी न पहुँच पाने के बाद एक नाटकीय घटनाक्रम में उसे त्याग की देवी बताकर और देश की जनता को अतुल्य अर्थशास्त्री नामक भूलभुलैया में भटकाकर आप को महिमामंडित कर सिंहासन पर बिठा दिया गया और आप अपने रिंग मास्टर की चाबुक के इशारे पर चलने लगे ! प्रधानमंत्रीजी अब तक मुझे शक था मगर अब यकीन हो गया है कि इस सरकार के सभी कारनामों में आप भी बराबर के गुनाहगार हैं, आज १२१ करोड़ की आबादी वाला यह महान राष्ट्र ऐसे हालात से गुजर रहा है जहां एक अशक्त राष्ट्रपति एवं एक लचर, लाचार, भीरु और भ्रष्ट प्रधानमन्त्री एक नाकाबिल भ्रष्ट आका और उसके अकर्मण्य पुत्र के आगे नतमस्तक हैं और विदेशी शक्तियों द्वारा संचालित मीडिया इस हकीकत को छद्म हिन्दू आतंकवाद कि आड़ में दफ़न कर रहा है ताकि जनमानस सच्चाई से अवगत न हो सके ! प्रधानमंत्रीजी आपने अपनी सहूलियत के हिसाब से जब चाहा चुप्पी साध ली और जब चाहा एक बेतुका बयान दे दिया ! जब भी देश आपकी और देखता आप इटली की संस्कृति का अनुसरण कर अपनी दो उँगलियों से व्ही का इशारा कर देश की जनता को चिढाते रहे की देखो तुम कितना भी चिल्लाओ जीत तो हम भ्रष्ट चापलूस मण्डली और हमारी सरगना की ही होगी ! प्रधानमंत्रीजी आप को सब पता था कि ए. राजा, कनिमोझी, मारन बंधू, चिदंबरम, कलमाड़ी, शीला दीक्षित, राबर्ट वड्रा इत्यादि क्या गुल खिला रहे हैं और आपने इनको बचाने का भरपूर प्रयत्न किया और कई दिनों तक आप मीडिया द्वारा आप पर चढ़ाई गई झूठी इमानदारी की वर्क की गर्त में इन्हें छुपाते रहे परन्तु अब वर्क के नीचे का मलबा मवाद बन गया है और इसकी बदबू देश के शहरों की सड़कों और गावों के गलियारों में फ़ैल गई है आपको इस पद पर रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है क्योंकि कोई भी संप्रभु राष्ट्र एक नाकारा और भ्रष्ट प्रधानमंत्री और उसकी अतिभ्रष्ट मण्डली को नहीं झेल सकता ! आपने देश के हम मासूम लोगों की भावनओं के साथ खिलवाड़ किया है और इसलिए हर देशवासी आपको कोस रहा है! आपको शाप दे रहा है! क्या आप आईने में देखकर अपने आप से आँख मिला सकते हैं? क्या आप अपने आप को कह सकते हैं कि मैंने देश को पतन की उस गर्त में पहुंचा दिया जहां अंग्रेज भी नहीं ले जा सके थे? क्या आपको नहीं लगता कि आपने देश को धोखा दिया है? हर देशवासी की पीठ में छूरा भोंका है? क्या आप भारत को अपना देश मानते हैं? क्या आपको इससे थोडा भी प्यार है? क्या आपको सरदार होने का अर्थ पता है? क्या आपको अपनी पगड़ी की लाज का ख़याल है? क्या आपमें आत्मसम्मान है? आप अपने नाते पोतियों से किस मुंह से इस देश की संस्कृति, सभ्यता संस्कार और विरासत की गाथा सुनायेंगे ? ऐसा क्या मिल गया है आपको की आप भारत और भारतियों से घ्रणा कर एक विदेशी के आधीन हो गए? क्या आपको नहीं लगता है की अब आपको म्रत्युपर्यंत राष्ट्र भक्त भारतवासी धिक्कारते रहेंगे? क्या स्वर्ग(?) में भी जाकर आपकी आत्मा को शांति मिलेगी? मुझे लगता है हमें एक भी प्रश्न का उत्तर नहीं मिलेगा बल्कि वही दो उँगलियों वाला व्ही का इशारा ही फिर से हमारे जख्मों को कुरेदेगा ! मित्रों अब समय आ गया है कि हर देशवासी का खून खोले और वह प्रधानमंत्री के दोनों हाथ पकड़कर जबरदस्ती ही कुर्सी से उठाकर उनको कानून के हवाले करे और इस महान राष्ट्र कि बागडोर एक ऐसे देशभक्त के हाथों में सोंपे जो इसकी माटी के कण कण से प्यार करता/करती हो ! वन्दे मातरम!!